गुरुवार, 24 नवंबर 2016

तुमने कहा था,
प्रेम और पागलपन पर्याय ही हैं, लगभग ,
और मैं अटक गयी लगभग पर
ये लगभग की सीमारेखा कितनी
विचित्र रहती होगी न
जहाँ प्रेम में पागलपन और
पागलपन में प्रेम का समावेश हो
जैसे चौखट हो कोई, न अंदर न बाहर
बस चौखट हो, किंतु
चौखट घर नही होती,
न घर से बाहर कोई जगह
जहाँ रहा जा सके, हाँ
टिक जरूर सकते दो पल को
इसलिए आप प्रेमी होते हैं
या पागल , बस और कुछ नहीं ।

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